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मध्यमग्राम से टुम्पा कयाल के चुनाव लडऩे की सुगबुगाहट तेज
कोलकाता। राजनीति में एक बार फिर कामदुनी शब्द की गूंज सुनाई देने लगी है, लेकिन इस बार यह किसी आंदोलन के लिए नहीं बल्कि चुनावी बिसात पर एक बड़े उलटफेर का संकेत दे रही है। करीब 13 साल पहले एक कॉलेज छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने निर्भीकता से न्याय मांगने वाली टुम्पा कयाल अब राजनीति की मुख्यधारा में कदम रख सकती हैं। साल्टलेक स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य के साथ टुम्पा की गोपनीय मुलाकात ने बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा टुम्पा कयाल को मध्यमग्राम विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि टुम्पा ने अभी तक आधिकारिक रूप से केसरिया झंडा नहीं थामा है, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी हालिया सक्रियता इस बात की तस्दीक कर रही है कि वे जल्द ही औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ले सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने राज्य की जिन 39 सीटों पर अब तक उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं, उनमें मध्यमग्राम प्रमुख है। रविवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुई अहम बैठक में इस संभावित उम्मीदवारी पर अंतिम मुहर लगने के कयास लगाए जा रहे हैं। शमीक भट्टाचार्य के साथ हुई इस मुलाकात को इसी चुनावी समीकरण की पहली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 7 जून 2013 को कामदुनी में हुए नृशंस सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड ने समूचे देश को झकझोर दिया था। घटना के 10 दिन बाद जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गांव पहुंची थीं, तब टुम्पा कयाल ने उनके सामने निडरता से खड़े होकर सुरक्षा और न्याय की मांग की थी। उस वक्त टुम्पा और उनकी साथी मौसमी कयाल इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरी थीं।
हालांकि, अक्टूबर 2023 में कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा तीन दोषियों की सजा रद्द करने और कुछ को बरी किए जाने के फैसले से टुम्पा को गहरा आघात लगा था। न्याय की इस अधूरी लड़ाई के बीच अब उनका चुनावी मैदान में उतरना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक चुनौती बन सकता है। मध्यमग्राम सीट पर टुम्पा कयाल की दावेदारी ने न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है, बल्कि सत्ताधारी दल की पेशानी पर भी बल ला दिए हैं। अगर टुम्पा चुनाव मैदान में उतरती हैं, तो वे महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आएंगी। अब सबकी नजरें दिल्ली में हुई बैठक के आधिकारिक निर्णय और टुम्पा कयाल के अगले कदम पर टिकी हैं, जो बंगाल चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।